पुरे भारतीय इतिहास में मुहम्मद बिन तुगलक (सल्तनत काल) के बाद शायद ये दूसरा अवसर है जब भारत नेतृत्वहीनता के दौर से गुज़र रहा है. एक ऐसे दौर जहाँ आप शासक से किसी भी अच्छे और दृढ़ फैसले की अपेक्षा नहीं कर सकते. विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व की दूसरी बड़ी थल सेना वाला देश आज एक अनाथ के समान विश्वपटल पर खड़ा है. जिसे कभी चीन, कभी पाकिस्तान, कभी श्रीलंका तो कभी बांग्लादेश से चुनौतियाँ मिलती रहती हैं और हमारी मनमोहन सरकार अपने नाम के समान हीं मौन धारण किये हुए रहती है. राजनितिक पटल पर अपने पड़ोसियों के अलावा अपने परम्परागत मित्रों में से भी इस सरकार ने रिश्ते ख़राब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, चाहे वो ईरान हो, चाहे रूस. इन परिस्थितियों का असर न सिर्फ हमारी छवि पर पड़ रहा है बल्कि इसका खामियाज़ा भेदभाव और अपमान के रूप में उन भारतियों को झेलना पड़ रहा है जो विदेशों में रह रहे हैं. इसका ताज़ा उदाहरण "देवयानी खोबरागाड़े (Devyani Khobragade)" जो कि अमेरिका में भारतीय राजनयिक हैं, का मामला है. ये भारत कि चुप रहने वाली मानसिकता का असर है कि हमारी एक महिला राजनयिक को सरे आम एक आम मुज़रिम कि तरह हथकड़ी लगा कर गिरफ्तार कर लिया जाता है, कपड़े उतार कर उनकी तलाशी ली जाती है. लेकिन अब वक़्त आ चुका है कि अमेरिका को उसी कि भाषा में समझाया जाये। पिछले 2 - 3 दिनों में भारत सरकार ने कई जवाबी कदम उठाये हैं और हम उम्मीद करते हैं कि इस बार भारत सरकार अपने कदम पीछे नहीं खिंचेगी। वैसे शायद ये मुमकिन भी नहीं है क्यों कि 2014 के आम चुनाव नज़दीक हैं और भारत सरकार अपनी छवि जनता के बीच ख़राब नहीं करना चाहेगी। लेकिन सवाल अब भी वही हैं कि आखिर विदेशों में हमें ऐसी परिस्थितियों का सामना क्यों करना परता है और क्या अगर ये चुनावी वक़्त नहीं होता तब भी क्या भारत सरकार अमेरिका पर उतना ही राजनयिक दबाव डाल पाती (डालती) ?
अब वक़्त आ चुका है जब भारत को वाकई एक दृढ और सक्षम प्रशासक की ज़रुरत है जो भारत को वास्तव में सुपर पॉवर का दर्ज़ा दिल सके। हर भारतीय को चाहे वो हिंदुस्तान में हों या विदेशों में वो इज्जत दिला सके जिसके वो वाकई में हक़दार हैं। ताकि हर भारतीय गर्व से कह सके कि हाँ मैं भारतीय हूँ (Yes, I'm a Proud Indian)।
by R. K. Sinha
अब वक़्त आ चुका है जब भारत को वाकई एक दृढ और सक्षम प्रशासक की ज़रुरत है जो भारत को वास्तव में सुपर पॉवर का दर्ज़ा दिल सके। हर भारतीय को चाहे वो हिंदुस्तान में हों या विदेशों में वो इज्जत दिला सके जिसके वो वाकई में हक़दार हैं। ताकि हर भारतीय गर्व से कह सके कि हाँ मैं भारतीय हूँ (Yes, I'm a Proud Indian)।
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