Search This Blog

Sunday, December 22, 2013

एक दृढ और सक्षम प्रशासक की ज़रुरत

पुरे भारतीय इतिहास में  मुहम्मद बिन तुगलक (सल्तनत काल) के बाद शायद ये दूसरा अवसर है जब भारत नेतृत्वहीनता के दौर से गुज़र रहा है. एक ऐसे दौर जहाँ आप शासक से किसी भी अच्छे और दृढ़ फैसले की अपेक्षा नहीं कर सकते. विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व की दूसरी बड़ी थल सेना वाला देश आज एक अनाथ के समान विश्वपटल पर खड़ा है. जिसे कभी चीन, कभी पाकिस्तान, कभी श्रीलंका तो कभी बांग्लादेश से चुनौतियाँ मिलती रहती हैं और हमारी मनमोहन सरकार अपने नाम के समान हीं मौन धारण किये हुए रहती है. राजनितिक पटल पर अपने पड़ोसियों के अलावा अपने परम्परागत मित्रों में से भी इस सरकार ने रिश्ते ख़राब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, चाहे वो ईरान हो, चाहे रूस. इन  परिस्थितियों का असर न सिर्फ हमारी छवि पर पड़ रहा है बल्कि इसका खामियाज़ा भेदभाव और अपमान के रूप में उन भारतियों को झेलना पड़ रहा है जो विदेशों में रह रहे हैं. इसका ताज़ा उदाहरण "देवयानी खोबरागाड़े (Devyani Khobragade)" जो कि अमेरिका में भारतीय राजनयिक हैं, का मामला है. ये भारत कि चुप रहने वाली मानसिकता का असर है कि हमारी एक महिला राजनयिक को सरे आम एक आम मुज़रिम कि तरह हथकड़ी लगा कर गिरफ्तार कर लिया जाता है, कपड़े उतार कर उनकी तलाशी ली जाती है. लेकिन अब वक़्त आ चुका है कि अमेरिका को उसी कि भाषा में समझाया जाये। पिछले 2 - 3 दिनों में भारत सरकार ने कई जवाबी कदम उठाये हैं और हम उम्मीद करते हैं कि इस बार भारत सरकार अपने कदम पीछे नहीं खिंचेगी। वैसे शायद ये मुमकिन भी नहीं है क्यों कि 2014 के आम चुनाव नज़दीक हैं और भारत सरकार अपनी छवि जनता के बीच ख़राब नहीं करना चाहेगी। लेकिन सवाल अब भी वही हैं कि आखिर विदेशों में हमें ऐसी परिस्थितियों का सामना क्यों करना परता है और क्या अगर ये चुनावी वक़्त नहीं होता तब भी क्या भारत सरकार अमेरिका पर उतना ही राजनयिक दबाव डाल पाती (डालती) ?

अब वक़्त आ चुका है जब भारत को वाकई एक दृढ और सक्षम प्रशासक की ज़रुरत है जो भारत को वास्तव में सुपर पॉवर का दर्ज़ा दिल सके। हर भारतीय को चाहे वो हिंदुस्तान में हों या विदेशों में वो इज्जत दिला सके जिसके वो वाकई में हक़दार हैं। ताकि हर भारतीय गर्व से कह सके कि हाँ मैं भारतीय हूँ (Yes, I'm a Proud Indian)।



by R. K. Sinha

खजुराहो क॓ मंदिर


खजुराहो की खूबसूरती ऐसी है जो भी यहां एक बार आता है, वह दोबारा आने की इच्छा जरूर रखता है। इसे प्यार का प्रतीक भी कहा जाता है। यहां काम मुद्रा में मग्न देवी-देवताओं की जो मूर्तियां हैं, उनमें से कहीं से भी अश्‍लीलता नहीं झलकती बल्कि सौंदर्य और प्यार का खूबसूरत अहसास होता है। प्यार क॓ साक्षी इन्हीं मंदिरों में प्रतिवर्ष कई जोड़े परिणय सूत्र में बंधकर अपने दाम्पत्य जीवन की शुरुआत करते हैं।

खजुराहो भारत का एक ऐसा पर्यटन स्थल है, जहां पर लोग प्राचीन कला क॓ दर्शन क॓ लिए आते हैं। यहां की दीवारों पर की गई कलाकारी की सजीवता को देखकर ऐसा लगता है, जैसे मूर्तियां हमसे कुछ कह रही हैं। यह दुर्लभ पर्यटन स्थल मध्यप्रदेश में स्थित है। यहां पर विदेशी पर्यटक भी उतने ही आते हैं, जितने कि देशी पर्यटक। हर साल यहां पर लाखों पर्यटक अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते हैं। शाम क॓ समय होने वाले लाइट शो में खजुराहो क॓ मंदिरों की खूबसूरती अपने चरम पर होती है।


खजुराहो एक पर्यटक स्थल होने क॓ साथ-साथ मंदिरों क॓ गांव क॓ रूप में भी विख्यात है। यहां 1000 साल से भी अधिक पुराने मंदिर हैं, जिन्हें मध्य भारत क॓ चंदेल राजपूत राजाओं ने बनवाया था। वर्तमान में प्राचीन 85 मंदिरों में से मात्र 22 मंदिर ही सुरक्षित बचे हैं, शेष मंदिर आज खंडहर क॓ रूप में तब्दील होकर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। खजुराहो क॓ प्रसिद्ध मंदिर पूर्वी पश्‍चिमी व दक्षिणी आदि तीन भागों में विभाजित हैं। खजुराहो में पश्‍चिमी भाग क॓ मंदिरों में प्रमुख मंदिर कंडरिया महादेव मंदिर, चौंसठ योगिनी मंदिर, ग्रेनाइट से बना सुंदर मंदिर, काली मां का मंदिर, देवी जगदंबा मंदिर आदि प्रमुख हैं।

इन मंदिरों क॓ उत्तर में चित्रगुप्त मंदिर, सूर्य देवता का मंदिर, विश्वनाथन मंदिर, तीन मुखी ब्रह्म‌्ाा की प्रतिमा तथा 6 फीट ऊंची नंदी प्रतिमा, मटंगेश्वर मंदिर, 8 फीट ऊंचा शिवलिंग आदि स्थित हैं। मंदिरों में स्थित प्रतिमाओं की जर्जर स्थिति को देखते हुए इनमें से कई मंदिरों में पूजा करना प्रतिबंधित है। इनमें से क॓वल मटंगेश्वर मंदिर में ही अब तक पूजा-अर्चना होती है।

पूर्वी भाग में हिंदू व जैन दोनों क॓ देवी-देवताओं की दुर्लभ प्रतिमाएं स्थित हैं। मंदिरों का यह भाग खजुराहो गांव क॓ समीप स्थित है। पूर्वी भाग का सबसे बड़ा मंदिर जैन तीर्थंकर भगवान पाश्र्वनाथ जी का मंदिर है। इसक॓ बाद दूसरा जैन मंदिर घाटी मंदिर है। इस मंदिर क॓ उत्तर में आदिनाथ मंदिर है। मंदिरों क॓ इस समूह में ब्रह्म‌्ाा, वामन आदि हिंदू देवताओं क॓ मंदिर भी शोभायमान हैं। दक्षिणी भाग क॓ मंदिरों का समूह खजुराहो गांव से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इनमें सबसे अच्छा मंदिर श्चित्रभुज मंदिर है। इस भाग क॓ मंदिरों से कुछ दूरी पर सड़क क॓ उस पार जैन मंदिरों का एक समूह है जिनमें कई जैन तीथर्ंकरों क॓ सुंदर व

आकर्षक मंदिर हैं।

भारतीय कला व संस्कृति क॓ संगम स्थल खजुराहों क॓ आसपास भी कई ऐसे स्थान हैं जो खजुराहो यात्रा को पूर्णता प्रदान करते हैं। इनमें खजुराहो से 25 किमी. दूर स्थित राजगढ़ पैलेस हैरिटेज होटल, रंगून झील पिकनिक स्पॉट, पन्‍ना रा‌ष्ट्रीय उद्यान आदि रमणीय स्थल हैं। भारत की इस विरासत को देखना मात्र ही अपने-आप में भारतीय कला से रूबरू होना है जो अपने-आप में अनूठी, प्राचीन व गौरवशाली है। अगर आप यहां एक बार आए तो निश्‍चित रूप से आप सब कुछ भूल जाएंगे। बस यहां की खूबसूरती और दीवारों पर उक॓री प्रतिमाएं ही आपक॓ मन-मानस पर बसी रहेंगी।





Courtesy: "Kayastha Are Best in Every Field"